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मध्य प्रदेश

औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994

मध्य प्रदेश को देश के औद्योगिक रूप से अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए बहुत-सी संभावनाएं हैं। औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 का उद्देश्य औद्योगिक विकास को गति और सुदृढ़ता प्रदान करना, अधिक पूंजीगत निवेश को आकर्षित करना, संतुलित क्षेत्रीय विकास को सुनिश्चित करना और लोगों के जीवन स्तर के उन्नयन में सहायता के लिए अतिरिक्त रोज़गार अवसर प्रदान करना है।

औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर हो रहे तीव्र आर्थिक परिवर्तनों का ध्यान रखती है। आर्थिक उदारीकरण के संदर्भ में, प्रशासन की विनियामक भूमिका को कम करने की अत्यधिक आवश्यकता है। प्रशासन की सुविधा प्रदाता की भूमिका को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। इस दस्तावेज में भौतिक और मानव संरचना आधार को सुदृढ़ करने, सुविधाओं और रियायतों के साथ-साथ संवर्धक उपायों का विवरण है। यह कराधान के प्रयोग का वर्णन रोज़गार सृजन में बढ़ोतरी और विभिन्न क्षेत्रों के मध्य योगवाही संपर्क विकसित करने के लिए एक उपकरण के रूप में करता है।

संरचनात्मक विकास को गति देने और संवर्धक गतिविधियों में तेज़ी लाने की दृष्टि से सरकार का प्रयास आगामी दो वर्षों में उद्योगों के लिए बजटीय आवंटन में वर्तमान चार प्रतिशत से सात प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का है।

औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 उत्तरदायी प्रशासन पर विशेष बल देती है। यह औद्योगिक विकास के लिए प्रशासन को एक अधिक परिणामोन्मुखी उत्तरदायी तंत्र बनाने के उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।

औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. मध्य प्रदेश को औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों की श्रेणी में स्थान दिलाना।
  2. "बिना उद्योग" के विकास प्रखंडों में अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करके संतुलित क्षेत्रीय विकास को सुनिश्चित करना।
  3. राज्य के मानव और प्राकृतिक संसाधनों के अधिकाधिक उपयोग से राज्य में औद्योगिक विकास को गति प्रदान करना।
  4. अधिक प्रत्यक्ष और परोक्ष रोज़गार अवसरों का सृजन करना।
  5. अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और गरीबी रेखा से नीचे के लोगों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करना।
  6. महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करना।
  7. ग्रामोद्योगों के गतिमान विकास के लिए विशेष अवसरों का सृजन करना।
  8. लघु उद्योग क्षेत्र के विकास के लिए नए अवसरों का सृजन करना।
  9. बड़े और मध्यम क्षेत्र में नए निवेशों का आकर्षित करने के लिए अवसरों का सृजन करना।
  10. लघु उद्योग इकाइयों और बड़े तथा मध्यम उद्यमों के मध्य योगवाही संपर्कों की सुविधा प्रदान करना।
  11. उच्च प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करना।
  12. शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए विशेष सुविधाएं सृजित करना।
  13. "संवेगी क्षेत्र" में उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करना और विशेष योजनाएं बनाना।
  14. संरचनात्मक विकास में निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित करना।
  15. औद्योगिक विकास के लिए सहकारिता क्षेत्र को प्रोत्साहित करना।
  16. वाणिज्यिक गतिविधियों को सुविधाएं प्रदान करना ताकि औद्योगिक विकास के संवर्धन में वाणिज्य एक महत्वपूर्ण कारक बन सके।
  17. पारदर्शिता और तीव्र निपटान की दृष्टि से प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण को सुनिश्चित करना।
  18. उद्यमियों से निरंतर अंत:क्रिया के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण को सुनिश्चित करना।

अपने समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, तीव्रता से विकसित हो रही संरचनाओं और एक सुदृढ़ मानव संसाधन आधार के कारण मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास की तीव्रतर गति के लिए अत्यधिक संभावनाएं हैं। राज्य की गतिशीलता का संकेत इस तथ्य से मिलता है कि चुंगीकर समाप्त करने वाला यह देश का पहला राज्य है, फाइबर ऑप्टिक्स जैसी अग्रणी प्रौद्योगिकी अपनाने वाला और गैर-सरकारी क्षेत्र में संरचना विकास प्रारंभ करते हुए एक टोल सड़क का विकास करने वाला भी पहला राज्य है। औद्योगिक नीति और कार्य योजना, 1994 का लक्ष्य राज्य की औद्योगिक संभावनाओं का चहुंमुखी विकास करना है।

1. रोज़गार सृजन

  1. प्रत्यक्ष और परोक्ष रोज़गार सृजित करने के लिए औद्योगीकरण एक महत्वपूर्ण औज़ार है।
  2. उच्च प्रौद्योगिकीय उद्योगों के विकास को प्राथमिकता देने के साथ-साथ यह दस्तावेज रोज़गार सृजन पर भी विशेष बल देता है।
  3. मानव संसाधन आधार के विकास के लिए पॉलिटेक्निकों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों सहित उद्यमिता विकास कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाया जाएगा।
  4. अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों तथा महिलाओं के लिए उद्यमिता और रोज़गार अवसरों के विकास पर विशेष बल दिया जाएगा।

2. आधारभूत संरचना

  1. अभिवृद्धि केंद्र विकास के केंद्र बने रहेंगे। उनमें प्रदान की गई सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। एयर कार्गो कांपलेक्स और कंटेनर डिपो जैसी आधारभूत संरचनाओं का तीव्रता से विकास किया जाएगा। संरचना विकास में निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  2. राज्य सरकार इस शर्त पर कि भूमि का उपयोग औद्योगिक कार्यों के लिए होगा, उद्यमियों को 99 वर्षों के पट्टे पर भूमि/शेडों का आवंटन करेगी। इस अवधि के दौरान, राज्य सरकार को नियमानुसार पट्टा किराया बढ़ाने का अधिकार होगा। उद्यमियों को उन्हें पट्टे पर दी गई भूमि को बेचने का अधिकार नहीं होगा। राज्य सरकार की अनुमति के बिना भू-उपयोग में परिवर्तन की आज्ञा नहीं होगी। पट्टा विलेख की शर्तों के उल्लंघन पर पट्टे को रद्द किया जा सकेगा।
  3. भूमि और शेडों के हस्तांतरण से संबंधित प्रक्रियाओं और उद्योग के संविधान में परिवर्तन संबंधी प्रावधानों का सरल बनाया जाएगा।
  4. शहरी भूमि सीमा अधिनियम के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों को छूट देने के लिए उद्योग आयुक्त को अधिकार प्रदान किए जाएंगे।
  5. औद्योगिक विकास केंद्रों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दुहराव को समाप्त किया जाएगा।
  6. प्रत्येक विकास केंद्र में अग्नि शमन और पुलिस स्टेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
  7. सरकार सामान्य बहिस्रावी उपचार संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी।
  8. विकास केंद्रों में सामाजिक और संरचनात्मक सुविधाओं के विकास के लिए उद्योग संघों को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रत्येक विकास केंद्र में एक विद्यालय, चिकित्सा केंद्र और मनोरंजन सुविधाओं के लिए रियायती दरों पर भूमि प्रदान की जाएगी।
  9. विकास केंद्रों के निकट हवाई पट्टियों के निर्माण के लिए उद्यमियों को रियायती दर पर भूमि आवंटित की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए अधिग्रहित निजी भूमि को वास्तविक अधिग्रहण लागत पर उपलब्ध कराया जाएगा। ये हवाई पट्टियां सार्वजनिक उपयोग के लिए होंगी।
  10. भोपाल, इंदौर और रायपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के मामले को भारत सरकार के साथ उठाया जाएगा। राज्य के अधिकाधिक औद्योगिक केंद्रों को हवाई नक्शे पर लाने तथा हवाई सेवाओं की वर्तमान आवृत्ति को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। हवाई अड्डों के निर्माण में निजी क्षेत्र की सहभागिता का स्वागत किया जाएगा। इंदौर और भोपाल के मध्य एक इंटरसिटी रेल सेवा स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे। इस मामले को भारत सरकार के साथ उठाया जाएगा।
  11. पीथमपुर में शीघ्र ही एक कंटेनर डिपो का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। राज्य के अन्य भागों में भी कंटेनर डिपो स्थापित किए जाएंगे।
  12. राज्य के औद्योगिक उत्पादों के तीव्र परिवहन के लिए सुविधा सुनिश्चित करने हेतु शीघ्र ही इंदौर में एक एयर कार्गो कांपलेक्स प्रारंभ किया जाएगा।
  13. भोपाल में एक व्यापार केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके बाद क्षेत्रीय व्यापार केंद्रों की स्थापना की जाएगी। नियमित रूप से व्यापार मेलों का आयोजन किया जाएगा। ये सुविधाएं वाणिज्य को औद्योगिक विकास में अधिक गतिशील योगदान देने वाला कारक बनाने में सहायता करेंगी।
  14. राज्य सरकार उद्योग संघों द्वारा टूलिंग और परीक्षण केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी। इन केंद्रों में सरकारी सहायता से प्रशिक्षण सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इंदौर में इंडो-जर्मन टूल रूम द्वारा विकसित किया जा रहा कांपलेक्स कुछ ही महीनों में कार्य करना प्रारंभ कर देगा।
  15. ए.के.वी.एन. विकास केंद्रों सेवाएं देना जारी रखेंगे, वाणिज्यिक आधार पर ऐसी सेवाओं का संचालन करने के लिए निजी एजेंसियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
  16. औद्योगिक क्षेत्रों और संपदाओं में लागत बंटाई आधार पर दिन प्रतिदिन की रखरखाव सेवाएं प्रदान करने के लिए उद्योग संघों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  17. निजी क्षेत्र द्वारा औद्योगिक मॉडल टाउनशिपों के विकास का स्वागत किया जाएगा। राज्य सरकार अपनी समान सहभागिता के माध्यम से भूमि प्रदान करेगी। इन टाउनशिपों को न केवल शेड और विकसित औद्योगिक भूखंड, अपितु आवास, विद्यालय, चिकित्सा केंद्र और मनोरंजन सुविधाओं जैसी सामाजिक आधारभूत संरचनात्मक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।
  18. लघु और अति लघु उद्योग क्षेत्र के लिए अभिवृद्धि केंद्रों की स्थापना में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य सरकार ऐसे केंद्रों के लिए अपनी समान सहभागिता के माध्यम से भूमि प्रदान करेगी। इस उद्देश्य के लिए सहकारिता क्षेत्र को रियायती दरों पर भूमि प्रदान की जाएगी।
  19. भारत सरकार ने राज्य में एक मिनी-अभिवृद्धि केंद्र की स्थापना के लिए अनुमोदन प्रदान कर दिया है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे ही मिनी अभिवृद्धि केंद्र स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे। इन मिनी अभिवृद्धि केंद्रों को अति लघु और लघु उद्योग क्षेत्र के लिए नियत किया जाएगा और इनमें बड़े अभिवृद्धि केंद्रों के समकक्ष सुविधाएं और रियायतें प्रदान की जाएंगी।
  20. उद्योग संघों के परामर्श से उद्योग निदेशालय/ए.के.वी.एन. द्वारा विशेषीकृत औद्योगिक कांपलेक्स विकसित किए जाएंगे। स्थानीय अग्रताओं को ध्यान में रखते हुए ये कांपलेक्स उत्पाद विशिष्ट होंगे और इलैक्ट्रॉनिक्स, परिधान, चमड़ा, खाद्य प्रसंस्करण आदि जैसे उत्पादों को कवर करेंगे। ये विशेषीकृत कांपलेक्स बाज़ार संपर्कों और आसान पहुंच वाले एक श्रमिक पूल के विकास में सहायता करेंगे। ये लगभग शून्य मालसूची स्तरों की अनुमति प्रदान करते हुए कच्चे माल और माध्यमिक वस्तुओं तक सुविधाजनक पहुंच भी प्रदान करेंगे। इन कांपलेक्सों की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाएगा और रियायती मूल्यों पर भूमि प्रदान की जाएगी।
  21. राज्य सरकार रसायन आधारित उद्योगों के लिए एक कांपलेक्स विकसित करने हेतु एक योजना तैयार करेगी।
  22. डायमंड कटिंग पर आधारित उद्योगों के लिए राज्य में एक डायमंड पार्क का विकास किया जाएगा।
  23. विकास के लिए इलैक्ट्रॉनिक क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए, इस क्षेत्र के उद्योगों को विशेष सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक इलैक्ट्रॉनिक पार्क स्थापित किया जाएगा।
  24. निर्यात उद्योगों के विस्तार और विकास के महत्व को देखते हुए एक निर्यात पार्क विकसित किया जाएगा। इस पार्क में निर्यातोन्मुख इकाइयों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। निजी क्षेत्र के माध्यम से निर्यात पार्क को सीधे बंदरगाहों तक अंतर-निदर्श परिवहन संपर्क उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जाएंगे।
  25. जेनेटिक प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के लिए एक प्रौद्योगिकीय पार्क विकसित किया जाएगा।
  26. नगरपालिकाओं, विकास प्राधिकरणों और पंचायतों जैसे स्थानीय निकायों द्वारा विकसित कुछ दुकानों को ग्रामोद्योग क्षेत्र के उद्यमियों के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
  27. खादी और ग्रामोद्योगों की स्थापना के लिए रियायती मूल्य पर राजस्व भूमि उपलब्ध कराने के लिए जिला कलेक्टरों को अधिकृत किया जाएगा।