राज्य
नीति

पश्चिम बंगाल औद्योगिक नीति

राज्य सरकार ने सितंबर 1994 में एक नई औद्योगिक नीति की घोषणा की है। औद्योगिक संवर्धन और आर्थिक विकास के लिए राज्य सरकार की नीति की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  1. राज्य सरकार उपयुक्त अथवा परस्पर लाभदायक विदेशी प्रौद्योगिकी और निवेश का स्वागत करती है।

  2. सरकार संवेगी विकास प्रदान करने में निजी क्षेत्र के महत्व और प्रमुख भूमिका को मान्यता प्रदान करती है। राज्य सरकार विद्युत उत्पादन में निजी क्षेत्र के निवेश का स्वागत करेगी।
  3. उद्योगों के संवेगी विकास के लिए औद्योगिक संरचनाओं का विकास और उन्नयन अपरिहार्य है। सरकार सड़कों, संचार और वृद्धि केंद्रों में सुधार की आवश्यकता को अनुभव करती है। चूंकि इन कार्यक्रमों में बड़ी मात्रा में निवेश की आवश्यकता है, इसलिए जब संभव हो, सरकार औद्योगिक संरचनाओं के विकास के लिए निजी संयुक्त क्षेत्र में भी परियोजनाएं प्रारंभ करने का प्रस्ताव करती है।
  4. सरकार ने पहले ही सामाजिक आधारभूत संरचनाओं जैसे सेटेलाइट टाउनशिप का विकास, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलापूर्ति, होटल आदि में ठोस सुधार की पहल कर दी है। पॉलिटेक्निकों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा को एक प्रमुख संवेग प्रदान किया गया है। स्वास्थ्य के मामले में, निजी और संयुक्त क्षेत्र के प्रयासों से कोलकाता तथा वृद्धि केंद्रों में और उनके आसपास हस्पताल सुविधाओं में सुधार और विस्तार की संभावनाएं खोजी जा रही हैं।
  5. सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के साथ, राज्य सरकार आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवश्यक संसाधनों तथा विशेषज्ञता के संवहन के लिए संयुक्त और सहायताप्राप्त क्षेत्रों को प्रभावी उपकरण के रूप में देखती है।
  6. उपलब्ध अवसरों और इस क्षेत्र की संभावनाओं के आधार पर, राज्य सरकार ने विशेष ध्यान देने के लिए संवेगी क्षेत्रों के रूप में कुछ क्षेत्रों को चुना है, जैसे
  7. क. पैट्रो-केमिकल और अनुप्रवाहगामी उद्योग

    ख. इलैक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी

    ग. लोहा और इस्पात, धात्विक और इंजीनियरिंग

    घ. टैक्सटाइल

    ङ. चमड़ा और चमड़ा उत्पाद

    च. खाद्य प्रसंस्करण, खाद्य तेल, सब्जी प्रसंस्करण और समुद्री उत्पाद

    छ. औषधीय पौधे, रबर, पाम ऑयल और चाय

    ज. आधारभूत ड्रग्स रसायनों और फार्मास्युटिकलों का निर्माण

    झ. खनिजों का अनुकूल उपयोग और खान आधारित उद्योगों का विकास

    ञ. रत्न और आभूषण तथा

    ट. पर्यटन और पर्यटन संबंधी गतिविधियों का संवर्धन।

पश्चिम बंगाल सरकार वाणिज्य और उद्योग विभाग
समूह एच

अधिसूचना

संख्या 91-सीएच/एच/4एफ-54/2000

जबकि राष्ट्रीय नीति के अनुपालन में 1 जनवरी 2000 से बिक्रीकर संबंधी प्रोत्साहनों को वापस ले लिया गया है।

और जबकि राज्य सरकार ने उसी तिथि से राज्य में उद्योगों के संवर्धन के लिए नए प्रकार के प्रोत्साहनों के विस्तार को आवश्यक और सामयिक समझा है।

अत: अब सरकार, वाणिज्य और उद्योग विभाग की समय-समय पर यथासंशोधित अधिसूचना संख्या 580-सीआई/एच दिनांक 22.06.1999 के अंतर्गत संस्वीकृत पश्चिम बंगाल प्रोत्साहन योजना 1999 का अतिक्रमण करते हुए, बड़ी, मध्यम और लघु औद्योगिक इकाइयों के लिए निम्न प्रकार से एक नई प्रोत्साहन योजना को अनुमोदित और स्वीकृत करती है:

    1. लघु शीर्षक:

      इस योजना को राज्य में स्थापित होने वाली बड़ी, मध्यम और लघु इकाइयों (जिन्हें इसके बाद इकाइयां कहा जाएगा) की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पश्चिम बंगाल प्रोत्साहन योजना, 2000 (जिसे इसके बाद 2000-योजना कहा जाएगा) कहा जा सकता है।

    2. प्रारंभ और अवधि:

      जब तक 2000-योजना के अंतर्गत स्वीकृत प्रोत्साहनों की संबंधित मदों के लिए विशेष रूप से उल्लेख न किया गया हो, यह योजना संपूर्ण पश्चिम बंगाल में 1 जनवरी 2000 को प्रभावी होगी और 31 दिसंबर 2004 को समाप्त होने वाली पांच वर्षों की अवधि तक वैध रहेगी।

    3. परिभाषाएं:

      जब तक संदर्भ में अन्यथा आवश्यक न हो, 2000-योजना में

      1. "राज्य सरकार" से तात्पर्य पश्चिम बंगाल सरकार और "केंद्रीय सरकार" से तात्पर्य भारत सरकार से है।

      2. "डब्ल्यू.बी.आई.डी.सी." से तात्पर्य पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड और "डब्ल्यू.बी.एफ.सी." से तात्पर्य पश्चिम बंगाल वित्त निगम से है।

      3. "डीआईसी" से तात्पर्य जिला उद्योग केंद्र से है।

      4. "डब्ल्यू.बी.टी.डी.सी." से तात्पर्य पश्चिम बंगाल पर्यटन विकास निगम से है।

      5. "राज्य वित्तीय संस्थानों" से तात्पर्य डब्ल्यू.बी.आई.डी.सी. और डब्ल्यू.बी.एफ.सी. से है।

      6. "अधिकृत एजेंट" से तात्पर्य डब्ल्यू.बी.आई.डी.सी. से है जो बड़े और मध्यम उद्योगों के संबंध में 2000-योजना के संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से अधिकृत एजेंट है। लघु उद्योग क्षेत्र में औद्योगिक उपक्रमों के लिए, जिला उद्योग केंद्र मामलों की जांच, सत्यापन और कुटीर एवं लघु उद्योग विभाग द्वारा इस उद्देश्य के लिए गठित जिला स्तरीय समिति को उनकी अनुशंसा करने के लिए अधिकृत होगा। पर्यटन इकाइयों के लिए, पश्चिम बंगाल पर्यटन विकास निगम अधिकृत एजेंट होगा।

      7. "इकाई" से तात्पर्य बड़े और मध्यम आकार में किसी औद्योगिक परियोजना से है जिसके पास उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) के अंतर्गत आशय पत्र, औद्योगिक लाइसेंस अथवा पंजीकरण प्रमाणपत्र, जो भी मामला हो, के रूप में अनुमोदन है अथवा जिसके पास 2000-योजना के अनुबंध-1 पर उद्योगों की नकारात्मक सूची में उल्लिखित मदों को छोड़कर केंद्रीय सरकार से औद्योगिक सहायता सचिवालय की संदर्भ संख्या के रूप में एक पावती है।

        अथवा

        कुटीर और लघु उद्योग निदेशालय के जिला उद्योग केंद्र के अंतर्गत अनंतिम/अस्थाई/स्थाई/अंतिम रूप से पंजीकृत कोई कुटीर एवं लघु उद्योग उपक्रम (औद्योगिक सहकारिताओं, अति लघु और लघु सेवा तथा व्यवसाय सहित)।

        अथवा

        औद्योगिक (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के अंतर्गत आशय पत्र अथवा औद्योगिक लाइसेंस अथवा पंजीकरण प्रमाणपत्र सहित 100 लाख रुपए से अधिक स्थाई पूंजी निवेश वाली कोई पर्यटन इकाई, अथवा पर्यटन इकाई के मामले में केंद्रीय सरकार से औद्योगिक सहायता सचिवालय संदर्भ संख्या की आवश्यकता होगी।

      8. "बड़ी/मध्यम इकाई" से तात्पर्य समय-समय पर भारत सरकार द्वारा परिभाषित एक इकाई से है।

      9. "लघु उद्योग इकाई" से तात्पर्य एक इकाई से है जिसमें भारत सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित सीमा के अनुसार निवेश किया गया है।

      10. "पर्यटन इकाई" से तात्पर्य बड़े और मध्यम क्षेत्र में एक परियोजना से है जो अनुबंध-2 में परिभाषित, और जैसाकि पर्यटन विभाग द्वारा आगे अधिसूचित किया जा सकता है, निम्नलिखित मदों में पर्यटन गतिविधियों से संबंधित है:

      11. क. होटल

        ख. मोटल

        ग. हेरिटेज होटल

        घ. यात्रीनिवास

        ङ. यात्रिका

        च. रिसोर्ट

        छ. पैलेस ऑन व्हील्स की तर्ज पर रेल यात्रा परियोजनाएं

        ज. एरियल रोपवेज़

        झ. रोमांचकारी पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए कैंप और सुविधाएं।

      12. "नई इकाई" से तात्पर्य बड़े/मध्यम/लघु क्षेत्र में एक औद्योगिक इकाई से है जिसमें पूंजीगत निवेश किया गया है और जो 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद पश्चिम बंगाल में वस्तुओं के निर्माण के लिए उद्यमी द्वारा स्थापित और प्रारंभ की गई है और जो उद्योग निदेशालय/ कुटीर एवं लघु उद्योग निदेशालय/पर्यटन निदेशालय, जो भी मामला हो, के साथ पंजीकृत है।

      13. "विद्यमान औद्योगिक इकाई" से तात्पर्य बड़े/मध्यम/लघु क्षेत्र में एक औद्योगिक इकाई से है जिसमें स्थाई पूंजीगत निवेश किया गया है और जो पश्चिम बंगाल में विद्यमान है तथा 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद अपने विस्तारित भाग में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के तत्काल पूर्व वस्तुओं का निर्माण करती थी।

      14. "मेगा इकाई" से तात्पर्य 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद 250.00 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश के साथ विशेष गुण स्थापना वाली एक पात्र इकाई से है।

      15. "अनुमोदित परियोजना" से तात्पर्य एक इकाई की औद्योगिक परियोजना से है जिसके लिए 2000-योजना के अंतर्गत पंजीकरण प्रमाणपत्र और पात्रता प्रमाणपत्र जारी किया जा चुका है।

      16. "अनुमोदित स्थान" से तात्पर्य केंद्रीय सरकार/राज्य सरकार के संबंधित प्राधिकरण के साथ पंजीकृत अनुमोदित परियोजना के स्थान से है।

      17. "अनुमोदित औद्योगिक कॉम्पलेक्स" से तात्पर्य एक औद्योगिक कॉम्पलेक्स से है जो राज्य अथवा केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से राज्य में सार्वजनिक अथवा निजी क्षेत्र में स्थापित किया गया है।

      18. "पात्र इकाई" से तात्पर्य बड़े/मध्यम/लघु क्षेत्र में एक इकाई से है जिसके पास उद्योग निदेशालय द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र और डब्ल्यू.बी.आई.डी.सी. द्वारा जारी पात्रता प्रमाणपत्र अथवा जिला उद्योग केंद्र द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र, जो भी मामला है, है।

        एक पर्यटन इकाई के लिए, एक "पात्र इकाई" वह इकाई होगी जिसके पास अपनी अनुमोदित परियोजना के लिए पर्यटन निदेशालय द्वारा जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र और पश्चिम बंगाल पर्यटन विकास निगम द्वारा पात्रता प्रमाणपत्र है।

      19. "विद्यमान इकाई का विस्तार" से तात्पर्य इसकी विद्यमान अनुमोदित क्षमता के भीतर उन्हीं मदों के उत्पादन अथवा बढ़ी हुई अनुमोदित क्षमता के लिए विस्तार अथवा एक अनुमोदित क्षमता के साथ नई मदों के निर्माण से है।

      20. स्पष्टीकरण-1

        ऐसी परियोजनाओं को उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के अंतर्गत उपयुक्त अनुमोदन अथवा एक औद्योगिक सहायता सचिवालय संदर्भ संख्या अथवा कुटीर एवं लघु उद्योग विभाग, पश्चिम बंगाल के अंतर्गत किसी निदेशालय, संबंधित जिला उद्योग केंद्र अथवा लघु उद्योग सेवा संस्थान, भारत सरकार अथवा पर्यटन निदेशालय, पश्चिम बंगाल सरकार, जो भी मामला हो, द्वारा कवर किया जाना चाहिए।

        स्पष्टीकरण-2

        एक विद्यमान इकाई के विस्तार के मामले में, अनुमोदित परियोजना पर किया जाने वाला स्थाई पूंजी निवेश, 1 जनवरी 2000 की स्थिति के अनुसार, भूमि, भवन और संयंत्र तथा मशीनरी की स्थाई परिसंपत्तियों के सकल मूल्य के 25 प्रतिशत से अधिक अथवा 50 लाख रुपए, जो भी कम हो, तक इकाई के स्थाई पूंजी निवेश के सकल मूल्य में बढ़ोतरी करेगा।

      21. "विस्तारित भाग" से तात्पर्य पश्चिम बंगाल में विद्यमान स्थान अथवा किसी भिन्न क्षेत्र में वस्तुओं के निर्माण के लिए राज्य सरकार के अनुमोदन से 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद अतिरिक्त क्षमता के साथ विस्तारित भाग से है।

      22. "स्थाई पूंजी निवेश" से तात्पर्य 2000 योजना के अनुच्छेद 6 में निर्धारित अन्य शर्तों के अध्यधीन, 1 अप्रैल 1999 को अथवा उसके बाद पात्र इकाई की अनुमोदित परियोजना की भूमि, भवन, संयंत्र और मशीनरी तथा प्रदूषण नियंत्रण उपायों के लिए स्थापित उपकरणों में किए गए निवेश से है।

      23. स्पष्टीकरण

        "स्थाई पूंजी निवेश" की गणना निम्न प्रकार की जाएगी:

        क. भूमि: अधिकृत एजेंट द्वारा अनुमोदित स्थान पर अनुमोदित परियोजना के लिए आवश्यकतानुसार फ्रीहोल्ड अथवा लीज़होल्ड भूमि के लिए प्रदत्त वास्तविक मूल्य अथवा प्रीमियम।

        ख. भवन: अनुमोदित स्थान पर अनुमोदित परियोजना के लिए आवश्यकतानुसार कार्यालय भवन, कारखाना शेड आदि के निर्माण के लिए किया गया वास्तविक व्यय, किंतु आवासीय क्वार्टर नहीं होने चाहिए।

        ग. संयंत्र और मशीनरी: संयंत्र और मशीनरी में स्थाई पूंजी निवेश की गणना निम्न प्रकार की जाएगी:

        किसी सेकेंडहैंड संयंत्र और मशीनरी तथा किराया-खरीद करार के अंतर्गत खरीदे और स्थापित किए गए संयंत्र और मशीनरी को छोड़कर, जिग्स, डाइयां, मोल्ड्स आदि उत्पादक उपकरणों और प्रदूषण शमनकारी उपायों की लागत सहित अनुमोदित स्थान पर स्थापित संयंत्र और मशीनरी की लागत।

        पट्टे पर लिए गए संयंत्र और मशीनरी के मामले में, पट्टे पर लेने के शुल्क/प्रभार की गणना की जाएगी, बशर्ते कि पट्टा अनुबंध की समाप्ति पर, कथित संयंत्र और मशीनरी इकाई की परिसंपत्ति बन जाएं।

        स्पष्टीकरण-1

        1 अप्रैल 1999 को अथवा उसके बाद पात्र इकाई की अनुमोदित परियोजना के लिए संयंत्र और मशीनरी के आपूर्तिकर्ता को प्रदत्त अग्रिमों को कुल स्थाई पूंजी निवेश की गणना में सम्मिलित किया जाएगा।

        स्पष्टीकरण-2

        लघु उद्योग क्षेत्र में परियोजनाओं के संबंध में पश्चिम बंगाल लघु उद्योग निगम और/अथवा राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के माध्यम से प्राप्त संयंत्र और मशीनरी के वास्तविक मूल्य की गणना करने में सहमत किश्तों पर ब्याज आदि को सम्मिलित नहीं किया जाएगा किंतु बिक्रीकर, उत्पाद-शुल्क और अन्य करों आदि सहित आधार मूल्य को इस उद्देश्य के लिए सम्मिलित किया जाएगा।

      24. "वर्ष" से तात्पर्य, जब तक विशिष्ट रूप से कहा न गया हो और संदर्भ के प्रतिकूल न हो, 1 अप्रैल से प्रारंभ होकर आगामी 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष से है।

      25. "कारखाना" से तात्पर्य अहातों सहित किसी परिसंपत्ति से है

      26. क. जिसमें दस अथवा अधिक श्रमिक कार्य कर रहे हैं अथवा कार्य कर रहे थे और जिसके किसी भाग में विद्युत की सहायता से एक निर्माण प्रक्रिया चलाई जा रही है अथवा सामान्यत: चलाई जाती है, अथवा

        ख. जिसमें बीस अथवा अधिक श्रमिक कार्य कर रहे हैं अथवा विगत बारह महीनों में किसी समय कार्य कर रहे थे और जिसके किसी भाग में विद्युत की सहायता से अथवा उसके बिना एक निर्माण प्रक्रिया चलाई जा रही है अथवा सामान्यत: चलाई जाती है, किंतु इसमें खान अधिनियम, 152 (1952 का 35) के संचालन के अधीन एक खान अथवा एक रेलवे रनिंग शेड सम्मिलित नहीं है।

      27. "कारखाना श्रमिकों" से तात्पर्य प्रत्यक्ष रूप से अथवा किसी एजेंसी के माध्यम से, चाहे वेतन के‍ लिए अथवा उसके बिना, किसी निर्माण प्रक्रिया में अथवा निर्माण प्रक्रिया हेतु प्रयुक्त मशीनरी अथवा परिसरों के किसी भाग की साफ-सफाई में अथवा निर्माण प्रक्रिया से प्रासंगित अथवा उससे संबंधित किसी अन्य प्रकार के कार्य अथवा निर्माण प्रक्रिया के विषय में नियुक्त एक व्यक्ति से है।

      28. "उद्योगों की नकारात्मक सूची" से तात्पर्य राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर यथासंशोधित इसके साथ अनुबंध-1 पर संलग्न उद्योगों की सूची से है।

    1. 2000-योजना की अनुप्रयोज्यता:

      2000-योजना सामान्यत: 1 जनवरी, 2000 को अथवा उसके बाद स्थापित होने वाली सभी बड़ी, मध्यम, कुटीर और लघु उद्योग परियोजनाओं तथा बड़े/मध्यम क्षेत्र की पर्यटन इकाइयों और विद्यमान इकाइयों की विस्तार परियोजनाओं पर भी लागू होगी। ये इकाइयां निजी क्षेत्र, सहकारी क्षेत्र, संयुक्त क्षेत्र सहित राज्य सरकार के स्वामित्व वाली अथवा उसके द्वारा प्रबंधित कंपनियां/उपक्रम हो सकती हैं।

    2. जहां 2000-योजना लागू नहीं है:

      • 5.1 2000-योजना उन औद्योगिक/पर्यटन परियोजनाओं पर लागू नहीं होगी जो किसी पिछली योजना के लिए पंजीकृत हुई हैं और जिनके लिए प्रोत्साहन स्वीकृत किए जा चुके हैं। उन्हें संबंधित योजनाओं के अंतर्गत पहले जारी किए गए पंजीकरण और स्वीकृतियों के प्रावधानों द्वारा विनियमित किया जाता रहेगा।

        परंतु, जिन परियोजनाओं को 1999 योजना के संबंध में पंजीकृत किया गया है और जिन्हें पात्रता प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, किंतु प्रोत्साहनों का संवितरण नहीं किया गया है, और यदि परियोजनाएं इस योजना के अंतर्गत शर्तों और निबंधनों को अन्यथा पूरा करती हैं तो संबंधित इकाइयां 2000-योजना के अंतर्गत पंजीकरण का विकल्प चुन सकती हैं।

        2000-योजना उद्योगों की नकारात्मक सूची में सूचीबद्ध उद्योगों पर लागू नहीं होगी।

    3. 2000-योजना के अंतर्गत प्रोत्साहनों के लिए पात्रता मानदंड:

      • 6.1.1 बड़े और मध्यम क्षेत्र में कोई औद्योगिक परियोजना जिस पर यह योजना लागू होती है, एक पात्रता प्रमाणपत्र प्राप्त करने की पात्र होगी, बशर्ते कि

        क. परियोजना इस उद्देश्य के लिए तैयार की गई एक विस्तृत संभाव्यता रिपोर्ट/परियोजना रिपोर्ट द्वारा कवर की गई हो,

        ख. परियोजना को केंद्रीय वित्तीय संस्थानों अथवा वाणिज्यिक बैंकों अथवा राज्य वित्तीय संस्थानों, जो भी स्थिति हो, ने अनुमोदित और स्वीकृत कर दिया हो। अपने स्रोतों से वित्त की व्यवस्था करने वाली परियोजनाओं के मामले में, पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने पर विचार किया जाएगा बशर्ते कि पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम ऐसे वित्त की व्यवस्था से संतुष्ट हो।

        6.1.2 लघु उद्योग क्षेत्र में कोई भी औद्योगिक इकाई नीचे वर्णित शर्तों को पूरा करने पर इस योजना के अंतर्गत प्रोत्साहनों के लिए पात्र होगी:

        1. उपरोक्त अनुच्छेद 3(7) के अंतर्गत परिभाषित लघु उद्योग क्षेत्र की इकाई अंतिम अथवा स्थाई रूप से संबंधित जिला उद्योग केंद्र के साथ पंजीकृत होगी। ऐसा स्थाई अथवा अंतिम पंजीकरण वैध और प्रवर्तन में होना चाहिए।

          यद्यपि, संयंत्र और मशीनरी में निवेश पर सब्सिडी के संबंध में, संबंधित उपक्रम 1 अप्रैल 1999 को अथवा उसके बाद अनंतिम अथवा अस्थाई रूप में पंजीकृत हो और स्थाई अथवा अंतिम पंजीकरण के स्थान पर इस प्रकार के वैध पंजीकरण को स्वीकार किया जा सकता है तथा संबंधित वित्तीय एजेंसी द्वारा स्वीकृत और संवितरित संयंत्र और मशीनरी में निवेश की मात्रा पर सब्सिडी की राशि का निर्णय किया जाएगा।

        2. खादी और ग्रामोद्योग आयोग अथवा पश्चिम बंगाल खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा सहायता प्राप्त औद्योगिक सहकारिताएं, उपक्रम तथा आईआरडीपी/एसईएसआरयू/ आईयूईपी/एसईईयूवाई और ऐसी अन्य स्वरोज़गार योजनाओं के अंतर्गत स्थापित उपक्रम जो इस योजना के अंतर्गत विनिर्दिष्ट किन्हीं मदों के संबंध में लाभ प्राप्त कर रहे हैं, इस योजना के अंतर्गत भी केवल अन्य मदों का लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे।

        6.1.3 "पर्यटन इकाई" के मामले में, पात्रता प्रमाणपत्र अनुच्छेद 6.1.1 के (ख) के अनुसार पश्चिम बंगाल पर्यटन विकास निगम द्वारा जारी किया जाएगा और पंजीकरण प्रमाणपत्र पर्यटन निदेशालय द्वारा जारी किया जाएगा और ऐसी किसी इकाई को उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 के अंतर्गत कोई औद्योगिक लाइसेंस अथवा आशय पत्र अथवा पंजीकरण प्रमाणपत्र अथवा केंद्रीय सरकार से औद्योगिक सहायता सचिवालय की संदर्भ संख्या की आवश्यकता नहीं होगी।

        1. पाइप्ड गैस में परिवर्तित करने और गैस प्रभारों के लिए सब्सिडी के लाभ हेतु, एक विद्यमान इकाई को ग्रेटर कोलकाता गैस सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड से पंजीकरण कराने और ग्रेटर कोलकाता गैस सप्लाई कारपोरेशन द्वारा अनुमोदित व्यय प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी।

        2. पाइप्ड गैस के उपयोग हेतु संयंत्र की स्थापना और गैस प्रभारों के लिए सब्सिडी के लाभ हेतु, एक नई इकाई/एक विद्यमान इकाई को अपनी विस्तार परियोजना के लिए उद्योग निदेशालय, पर्यटन निदेशालय से एक पंजीकरण प्रमाणपत्र अथवा जिला उद्योग केंद्र से पंजीकरण प्रमाणपत्र, जो भी मामला हो, तथा ग्रेटर कोलकाता गैस सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा अनुमोदित व्यय की पात्रता की आवश्यकता होगी।

    1. विकसित और पिछड़े क्षेत्रों का वर्गीकरण:

    2. अनुमोदित परियोजनाओं के लिए इस योजना के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों के प्रकारों और मात्रा के निर्णय के उद्देश्य के लिए, उनके स्थान के अनुसार, राज्य को निम्नलिखित समूहों में वर्गीकृत किया जाएगा:

      समूह क - कोलकाता नगर निगम

      समूह ख - हावड़ा, हुगली, उत्तरी 24 परगना, कोलकाता नगर निगम के क्षेत्राधिकार वाले क्षेत्रों को छोड़कर दक्षिणी 24 परगना, बर्दवान, नादिया और मिदनापुर जिले।

      समूह ग - मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पुरूलिया, बांकुरा, मालदा, कूचबिहार, उत्तरी दीनाजपुर, दक्षिणी दीनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिले।

      इस योजना में प्रदान की गई सीमा के अलावा समूह-क के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में स्थापित किसी इकाई को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।

    3. राज्य पूंजी निवेश सब्सिडी:

      • 8.1 समूह "ख" में स्थित और राज्य में 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद स्थापित एक पात्र औद्योगिक इकाई 150.00 लाख रुपए की सीमा के अधीन स्थाई पूंजी निवेश के 15 प्रतिशत की दर पर राज्य पूंजी निवेश सब्सिडी की पात्र होगी।

        8.2 समूह "ग" में स्थित और राज्य में 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद स्थापित एक पात्र औद्योगिक इकाई 250.00 लाख रुपए की सीमा के अधीन स्थाई पूंजी निवेश के 25 प्रतिशत की दर पर राज्य पूंजी निवेश सब्सिडी की पात्र होगी।

    4. ब्याज सब्सिडी:

      • 9.1 एक पात्र औद्योगिक इकाई अपनी अनुमोदित परियोजना के लिए निम्नानुसार इकाई के स्थान पर निर्भर करते हुए 100.00 लाख रुपए की सीमा के अध्यधीन, अनुमोदित परियोजना के कार्यान्वयन के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित एक वाणिज्यिक बैंक/वित्तीय संस्थान/एनबीएफसी से लिए गए ऋण पर वार्षिक ब्याज देयताओं के 50 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी की पात्र होगी:

        1. समूह "ख" क्षेत्र - 5 वर्ष

        2. समूह "ग' क्षेत्र - 7 वर्ष

        9.2 ऋणप्रदाता बैंकों/वित्तीय संस्थानों/एनबीएफसी द्वारा प्रतिवर्ष इस आशय का एक कथन/प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर कि इकाई ने देय तिथियों को संस्थान को देय ब्याज का भुगतान कर दिया है, ब्याज सब्सिडी का भुगतान किया जाएगा।

    5. विद्युत शुल्कों पर छूट:

      अपनी अनुमोदित परियोजना के लिए एक पात्र इकाई वाणिज्यिक उत्पादन/संचालन प्रारंभ करने की तिथि से 5 वर्षों की अवधि के लिए अपने उत्पादन/संचालन गतिविधियों के लिए उपभोग की गई विद्युत पर विद्युत शुल्क की छूट की पात्र होगी।

    6. रोज़गार सृजन सब्सिडी:

        11.1 बड़े और मध्यम क्षेत्र में एक पात्र इकाई निम्नानुसार स्थान पर निर्भर करते हुए कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के अपने अंशदान के भुगतान के लिए उसके द्वारा किए गए व्यय के 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की पात्र होगी:

        1. समूह "ख" क्षेत्र - 5 वर्ष

        2. समूह "ग" क्षेत्र - 7 वर्ष

        11.2 लघु उद्योग क्षेत्र में एक पात्र इकाई निम्नानुसार स्थान पर निर्भर करते हुए कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के अपने अंशदान के भुगतान के लिए उसके द्वारा किए गए व्यय के 75 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की पात्र होगी:

        1. समूह "ख" क्षेत्र - 5 वर्ष

        2. समूह "ग" क्षेत्र - 7 वर्ष

        11.3 उपरोक्त उप-अनुच्छेद 11.1 और 11.2 में निर्धारित व्यय की प्रतिपूर्ति इस शर्त के अधीन कि इकाई ने ईएसआई और ईपीएफ के अपने अंशदान का भुगतान देय तिथियों पर कर दिया है, न्यूनतम वैधानिक सीमा के आधार पर वार्षिक रूप से देय होगी।

    7. स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क पर छूट:

        12.1 एक पात्र औद्योगिक इकाई, कहीं भी स्थित हो, अनुमोदित परियोजना की स्थापना के लिए भूमि और भवन की खरीद/अधिग्रहण के संबंध में राज्य के अंतर्गत प्रलेखों के पंजीकरण के उद्देश्य के लिए वांछित स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क के 50 प्रतिशत के भुगतान से छूट प्राप्त करने की पात्र होगी।

        12.2 योजना में कहीं उल्लिखित न होने के बावजूद, उपरोक्त अनुच्छेद 12.1 में निर्धारित प्रोत्साहन इस योजना की अधिसूचना जारी होने की तिथि से अनुमेय होंगे।

    8. पाइप्ड गैस के प्रयोग के लिए परिवर्तन हेतु सब्सिडी:

        13.1 एक विद्यमान इकाई जो कहीं भी स्थित हो और जो 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद विनिर्माण/संचालन के लिए पाइप्ड गैस के उपयोग के लिए परिवर्तन करा रही है, 10.00 लाख रुपए की सीमा के अध्यधीन, भट्ठी आदि के आवश्यक परिवर्तन के लिए निवेश के 75 प्रतिशत के बराबर सब्सिडी की पात्र होगी।

        13.2 1 जनवरी 2000 को अथवा उसके बाद स्थापित होने वाली एक नई इकाई जो अपनी अनुमोदित परियोजना के लिए विनिर्माण/ संचालन हेतु पाइप्ड गैस के उपयोग पर विचार कर रही है, पाइप्ड गैस के प्रयोग के लिए इकाई में आवश्यक उपकरणों की स्थापना हेतु उपरोक्त उप-अनुच्छेद 13.1 में निर्धारित लाभ की पात्र होगी।

        13.3 उपरोक्त उप-अनुच्छेद 13.1 और 13.2 में उल्लिखित एक विद्यमान इकाई अथवा एक नई इकाई, इकाई के वाणिज्यिक विनिर्माण/ संचालन के लिए गैस की आपूर्ति की प्रारंभ होने की तिथि से 5 वर्षों की अवधि के लिए विनिर्माण/संचालन हेतु प्रयुक्त गैस पर गैस प्रभार की 20 प्रतिशत सब्सिडी की पात्र होगी।

    1. लघु उद्योग क्षेत्र में गुणवत्ता उन्नयन के लिए सब्सिडी:

      लघु उद्योग क्षेत्र में एक पात्र औद्योगिक इकाई को प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना और अनुमोदित संस्थानों/अनुसंधान प्रयोगशालाओं से आईएसआई प्रमाणन/आईएसओ 9000 प्राप्त करने के लिए व्यय के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति जो अधिकतम 5.00 लाख रुपए है, की जाएगी।

    2. सूचना प्रौद्योगिकी, इलैक्ट्रॉनिक्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों तथा एचपीएल (हल्दिया पैट्रोकेमिकल्स लिमिटेड) से अतिरिक्त प्रोत्साहन अनुप्रवाहगामी परियोजना:

      समूह "क" क्षेत्रों में स्थित सूचना प्रौद्योगिकी (साफ्टवेयर, हार्डवेयर), इलैक्ट्रॉनिक्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा एचपीएल अनुप्रवाहगामी परियोजनाएं उन्हीं प्रोत्साहनों के लिए पात्र होंगी जो सामान्यत: समूह "ख" में स्थित एक नई इकाई को अनुमेय होते हैं।

      समूह "ख" और समूह "ग" क्षेत्रों में स्थित सूचना प्रौद्योगिकी (सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर), इलैक्ट्रॉनिक्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा एचपीएल अनुप्रवाहगामी परियोजनाएं 20.00 लाख रुपए की आगामी सीमा के अध्यधीन ब्याज देयताओं के 10 प्रतिशत की अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी की पात्र होंगी। ऐसे सभी मामलों में 2 वर्षों की एक अतिरिक्त अवधि के लिए कुल ब्याज सब्सिडी उपलब्ध होगी।

      सूचना प्रौद्योगिकी (सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर), इलैक्ट्रॉनिक्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा एचपीएल अनुप्रवाहगामी परियोजनाएं, कहीं भी स्थित हों, अनुमोदित परियोजना की स्थापना के लिए भूमि और भवन की खरीद/अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए वांछित स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क के भुगतान से संपूर्ण छूट की पात्र होंगी।

      एक विद्यमान इकाई की अनुमोदित विस्तार परियोजना के लिए प्रोत्साहन

      अपनी अनुमोदित विस्तार परियोजना के लिए एक विद्यमान इकाई, एक नई इकाई के लिए संबंधित मद हेतु निर्धारित शर्तों को पूरा करने के अध्यधीन, इस योजना में उपरोक्त सभी प्रोत्साहनों की पात्र होगी।

    1. आधुनिकीकरण के साथ अवस्थापना पर चर्मशोधन और विनिर्माण क्षेत्रों दोनों में चर्म इकाइयों के लिए प्रोत्साहन:

      • 15.1 कोलकाता चर्म कॉम्पलेक्स में अवस्थापित होने वाली चर्मशोधन और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों की चर्म इकाइयां पूंजी निवेश सब्सिडी की पात्र होंगी यदि अवस्थापना और आधुनिकीकरण साथ-साथ हों। सब्सिडी की मात्रा, अधिकतम 150.00 लाख रुपए के अध्यधीन, बड़ी और मध्यम इकाइयों के मामले में संयंत्र और मशीनरी में नवीनतम निवेश की 15 प्रतिशत और लघु उद्योग इकाइयों के मामले में संयंत्र और मशीनरी में नवीनतम निवेश की 25 प्रतिशत होगी।

        15.2 यदि अवस्थापना और आधुनिकीकरण साथ-साथ होते हैं, तो अपने स्थान से अनुमोदित औद्योगिक कॉम्‍पलेक्स में जाने के लिए उपरोक्त उप-अनुच्छेद 15.1 में उल्लिखित इकाइयों के लिए निर्धारित विस्तारित समान लाभों पर प्रत्येक मामले की गुणवत्ता के आधार पर राज्य सरकार द्वारा अन्य उद्योगों पर विचार किया जाएगा।

    2. बड़ी परियोजनाएं:

      योजना में कहीं उल्लेख न होने के बावजूद, राज्य सरकार इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित क्षेत्रों में, प्रत्येक मामले के आधार पर, परियोजना की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए एक बड़ी परियोजना को प्रोत्साहनों का विशेष पैकेज प्रदान करने पर विचार कर सकती है:

      1. निवेश का आकार

      2. उद्योग की विशेष प्रकृति

      3. रोज़गार संभाव्यताएं

      4. उद्योग पर अनुप्रवाहगामी प्रभाव

      5. उद्योग पर अनुषंगीकरण प्रभाव

      6. निर्यात संभाव्यताएं

    3. संशोधन और/अथवा छूट देने/निरस्त करने का अधिकार:

      2000-योजना के किन्हीं प्रावधानों में उल्लिखित न होने के बावजूद, राज्य सरकार किसी भी समय -

      1. इस योजना में कोई संशोधन अथवा इसे निरस्त कर सकती है, किंतु एक अनुमोदित परियोजना के लिए पहले की गई वचनबद्धताएं ऐसे किसी संशोधन अथवा निरस्तीकरण से प्रभावित नहीं होंगी।

      2. इस योजना के प्रावधानों को लागू करने में कोई छूट दे सकती है, किंतु ऐसी छूट प्रत्येक मामले में अनुमोदित परियोजना की गुणवत्ता जिसे राज्य सरकार आवश्यक और उपयुक्त समझे, पर दी जाएगी।

      3. इस योजना के कार्यान्वयन की सुगमता, विसंगतियों को हटाने और इस योजना के प्रावधानों की व्याख्याओं को स्पष्ट करने के लिए निर्देश और दिशानिर्देशक जारी कर सकती है।

    4. निरस्तीकरण और निरंतरता:

        20.1 पश्चिम बंगाल प्रोत्साहन योजना 1999 निरस्त हो जाएगी और 2000-योजना के प्रारंभ की तिथि से पश्चिम बंगाल प्रोत्साहन योजना, 2000 द्वारा स्थान्नापित हो जाएगी।

        1. किसी पिछली योजना में कृत वचनबद्धताएं जो उस योजना पर आधारित हैं, उसी योजना द्वारा नियंत्रित की जाती रहेंगी।

        यह योजना वित्त विभाग की सहमति से उनके यू.ओ. संख्या : समूह ग. 169 दिनांक 05.02.2001 द्वारा जारी की जाती है।

    राज्यपाल के आदेशानुसार

    जवाहर सरकार

    सचिव,

    पश्चिम बंगाल सरकार

    अनुबंध-1


    (देखें अनुच्छेद 3(24))

    उद्योगों की नकारात्मक सूची

    1. हाइड्रोजेनेटिड खाद्य तेल

    2. हस्पताल, नर्सिंग होम, क्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर

    3. मनोरंजन पार्क

    4. ईंटें (फ्लाइऐश ईंटों, सैंडलाइम ईंटों, रीफ्रैक्टरी ईंटों को छोड़कर)

    5. विद्युत उत्पादन के लिए थर्मल संयंत्र

    6. विद्युत वितरण

    7. एक्वाकल्चर परियोजनाएं

    8. इस सूची में सम्मिलित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य उद्योग।

    अनुबंध-2

    होटल:

    होटलों में 1 से 5 सितारा श्रेणी की स्थापनाओं के लिए वांछित अथवा समय-समय पर भारत सरकार अथवा पश्चिम बंगाल सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा जारी/जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुमोदित गैर-सितारा श्रेणी की सुविधाएं होनी चाहिए। उनका आकार ऐसी इकाइयों के लिए पर्यटन विभाग, भारत सरकार/पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार होना चाहिए। एक होटल में किराए पर देने के लिए न्यूनतम 10 कमरे, स्वागत केंद्र-सह-लौंज, रेस्टोरेंट, बार, एक छोटा सम्मेलन कक्ष और कार-पार्किंग के लिए स्थान होना चाहिए।

    मोटल:

    एक मोटल परियोजना में किराए पर देने के लिए न्यूनतम दो कमरों, सार्वजनिक शौचालयों, एक रेस्टोरेंट, एक प्राथमिक सहायता केंद्र, दवा स्टोर, एक सुविधा स्टोर, हस्तशिल्प विक्रय केंद्र और न्यूनतम दस वाहनों के लिए पार्किंग स्थल वाली राजमार्ग सुविधाएं होनी चाहिए। बार, सार्वजनिक टेलीफोन बूथ, कार-रिपेयरिंग की दुकान और वाहनों के लिए पैट्रोल पम्प को वांछित गतिविधियों के रूप में सम्मिलित किया जा सकता है। एक मानक मोटल के लिए लगभग एक हैक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी।

    हेरिटेज होटल:

    एक हेरिटेज होटल परियोजना एक महल/किले/शानदार वास्तुकला के भवन में स्थित होना चाहिए जो 1950 से पहले निर्मित हो और जिसे किराए पर देने के लिए न्यूनतम 10 कमरों के साथ एक होटल में परिवर्तित किया जा रहा हो। सेवाओं के साथ सुविधाएं और विशेषताएं समय-समय पर हेरिटेज होटलों के लिए अनुप्रयोज्य पर्यटन विभाग, भारत सरकार के वर्गीकरण दिशा-निर्देशों के अनुसार होनी चाहिए। एक हेरिटेज होटल में उपरोक्त मद 1 में उल्लिखित एक होटल में उपलब्ध सभी सामान्य सुविधाएं होनी चाहिए।

    यात्रीनिवास:

    यात्रीनिवास वास्तव में पारगमन आवास के लिए किराए पर देने हेतु 10 अथवा अधिक कमरों का एक कम बजट का होटल है जो हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और केंद्रीय बस टर्मिनल के निकट स्थित होता है और जिसमें उपरोक्त मद 1 में उल्लिखित एक होटल में उपलब्ध सभी सामान्य सुविधाएं होंगी।

    यात्रिका:

    यात्रिका वास्तव में तीर्थयात्रियों को आवास के लिए किराए पर देने हेतु 10 अथवा अधिक कमरों का एक कम बजट का होटल है जिसमें उपरोक्त मद 1 में उल्लिखित एक होटल में उपलब्ध सभी सामान्य सुविधाएं होंगी। इसमें बार की सुविधा नहीं होगी जिसे तीर्थ स्थल की परंपराओं पर निर्भर करते हुए अनुमति दी अथवा नहीं दी जा सकती है।

    पर्यटक रिसोर्ट:

    एक पर्यटक रिसोर्ट से तात्पर्य एक इकाई से है जिसमें निम्नलिखित में से कोई न्यूतम आठ गतिविधियां/सुविधाएं होनी चाहिए:

    क. स्वास्थ्य क्लब सुविधाएं अर्थात् सौनाबाथ, जैकज्ज़ी, भाप स्नान, व्यायामशाला आदि।

    ख. पानी के खेल अर्थात् व्हाइट वाटर राफ्टिंग, कैनोइंग, कायाकिंग, वाटर स्कीइंग, याटिंग, विंडसर्फिंग, रोइंग, पैडल बोटिंग आदि।

    ग. स्वीमिंग पूल।

    घ. एयरोस्पोर्ट्स अर्थात् पॉवर फ्लाइंग, एक हैंग-ग्लाइडिंग, पैराग्लाइडिंग, पैरा-सेलिंग आदि।

    ङ. स्कीइंग।

    च. आइस-स्केटिंग।

    छ. रोल स्केटिंग।.

    ज. खेल जैसे टेनिस, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, बिलियर्ड्स, बॉलिंग एलेय।

    झ. गोल्फ।

    ञ. एंगलिंग।

    ट. प्राकृतिक चिकित्सा सुविधाएं अर्थात् प्राकृतिक चिकित्सा, योग, आयुर्वेदिक/ जड़ी-बूटी उपचार।

    ठ. नाई की दुकानों और मालिश की सुविधाओं सहित ब्यूटी पार्लर।

    ड. क्रेच, पार्क, इनडोर खेल और अन्य मनोरंजन सुविधाओं सहित बच्चों के खेलने के लिए स्थान।

    ढ. लैंडस्केप गार्डन और ऑरकार्ड।

    ण. जॉगिंग ट्रैक/नेचर ट्रेल्स।

    त. सम्मेलन/सभा सुविधाएं।

    थ. शॉपिंग आर्केड।

    द. वीडियो लाइब्रेरी सहित पुस्तकों से भरा पुस्तकालय।

    ध. ऑडिटोरियम।

    पर्यटन रिसोर्ट को काफी बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होती है और ये सामान्यत: ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित होते हैं।

    रोमांचकारी पर्यटन को प्रोत्साहित करने वाले कैंप और सुविधाएं:

    कैंप और टैंट सुविधाओं की परियोजना में न्यूनतम 1 एकड़ भूमि पर कम से कम 5 टैंट, चलते हुए पानी के साथ महिलाओं और पुरुषों के लिए न्यूनतम दो शौचालय और स्नानघर तथा एक रेस्टारेंट होने चाहिए। कैंप स्थल पर कैंप करने वालों के लिए विशिष्ट मल निपटान बिंदु होने चाहिए। कूड़ा, मल और ठोस कचरे के निपटान के लिए उपयुक्त व्यवस्थाएं होनी चाहिए।

    रोमांचकारी पर्यटन में जंगलों और पर्वतों पर ट्रैकिंग, पर्वतारोहण, माउंटेन बाइकिंग, रॉक क्लाइंबिंग, केनोइंग, कायाकिंग, वाटर स्कीइंग, याटिंग, रिवर राफ्टिंग, लंबी दूरी की तैराकी और पैरा-सेलिंग, कार रैली आदि सम्मिलित हैं।

    एरियल रोपवे

    एरियल रोपवे से तात्पर्य ऊपर लगी रस्सियों की एक प्रणाली से है जिस पर यात्रियों, पशुओं अथवा सामानों को ले जाने के उद्देश्य से वाहन का प्रयोग किया जाता है और इसमें खंबे, रस्सियां, वाहन, स्टेशन, कार्यालय, भांडारागार, कर्मशाला, मशीनरी और एरियल रोपवे के उद्देश्य के लिए प्रयुक्त अन्य उपकरण तथा ऐसे एरियल रोपवे के लिए आवश्यक भूमि सम्मिलित है।

    "पैलेस-ऑन-व्हील्स" की तर्ज पर रेल यात्रा परियोजनाएं

    "पैलेस-ऑन-व्हील्स" परियोजनाएं (क) पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा (बुद्धिस्ट सर्किट) अथवा (ख) सिलीगुड़ी, कर्सियांग और दार्जिलिंग (पर्वतीय सर्किट) को जोड़ सकती हैं। ऐसी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र और भारतीय रेलवे के सहयोग की आवश्यकता होगी।