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सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि योजना
भूमिका :
देश में लगभग 26 मिलियन सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई) हैं, जो लगभग 60 मिलियन व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। एमएसई सेक्टर विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत तक योगदान देता है तथा देश के निर्यात में इसका योगदान लगभग 40 प्रतिशत है। एमएसई द्वारा सामना की जा रही सभी समस्याओं में से तर्कसंगत ब्याज दरों पर पर्याप्त मात्रा में और समय पर ऋण का उपलब्ध न हो पाना प्रमुख समस्या है। इस क्षेत्र को बैंकों से धन की कम उपलब्धता का एक प्रमुख कारण बैंकों द्वारा एमएसई को ऋण देने में उच्च जोखिम की अवधारणा है और कोलेटेरल की निरन्तर मांग करना है, जो इन जो उद्यमों के पास आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। यह समस्या उन सूक्ष्म उद्यमों तथा प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों के लिए और अधिक गंभीर हो जाती है जिन्हें कम ऋण की आवश्यकता है।
2. सूक्ष्म और लघु उद्यम क्षेत्र को कोलेटरल-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार द्वारा सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि योजना (सीजीएमएसई) प्रारंभ की गई थी। इस योजना के अंतर्गत विद्यमान तथा नए उद्यमी, दोनों पात्र हैं। सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि योजना को कार्यान्वित करने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) नामक एक ट्रस्ट स्थापित की है। यह स्कीम औपचारिक तौर पर 30 अगस्त, 2000 को प्रारंभ की गई थी तथा यह 1 जनवरी, 2000 से प्रभावी है। सीजीटीएमएसई के कॉर्पस में सरकार तथा सिडबी क्रमश: 4:1 के अनुपात में योगदान दे रही है तथा 31 मार्च, 2010 तक इस ट्रस्ट के कॉर्पस में 1906.55 करोड़ रूपए का योगदान दिया जा चुका है। जैसा कि एमएसई के लिए पैकेज में घोषणा की गई थी, 11वीं योजना के अंत तक इस कॉर्पस में 2500 करोड़ रूपए जुटाने हैं।
पात्र ऋणदाता संस्थान:
3. इस स्कीम के तहत पात्र संस्थानों में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक/निजी क्षेत्र के बैंक/विदेशी बैंक) तथा चयनित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (जिन्हें नाबार्ड द्वारा’ संवहनीय व्यवहार्य’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, पात्र हैं। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (एनएसआईसी), पूर्वोत्त्र विकास वित्त निगम लिमिटेड (एनईडीएफसी) तथा सिडबी को भी पात्र संस्थान बनाया गया है। 31 मार्च, 2010 तक इस ट्रस्ट (एमएलआई) के रूप में 112 पात्र ऋणदाता संस्थान पंजीकृत थे, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंक, निजी क्षेत्र के 16 बैंक, 61 क्षेत्रिय ग्रामीण बैंक, 2 विदेशी बैंक तथा 6 अन्य संस्थान नामत: एनएसआईसी, एनईडीएफआई, और सिडबी और तमिलनाडु औद्योगिक निवेश निगम (टीएनआईआईसी) शामिल हैं।
पात्रता क्रेडिट सुविधा:
4. इस स्कीम के तहत कवर की जाने वाली क्रेडिट सुविधाओं में प्रति ऋण प्राप्तकर्ता यूनिट में आवधिक ऋण तथा कार्यशील पूंजी सुविधा, दोनों के लिए 100 लाख रूपए तक प्राप्त करने के लिए पात्र हैं, जिसे बिना किसी कोलेटरल सिक्यूरिटी अथवा तीसरे पक्ष की गारंटी के नये अथवा विद्यमान सूक्ष्म और लघु उद्यमों तक बढ़ाया गया है। गारंटी स्कीम के तहत कवर की जाने वाली उन यूनिटों के लिए जो प्रबंधन के नियंत्रण के बाहर के कारणों से रूग्ण हो जाती है, उनके लिए भी ऋणदाता द्वारा दी जा रही पुनर्वास सहायता को भी गारंटी स्कीम के तहत कवर किया जा सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि यदि ऋण की सुविधा 50 लाख रूपए से अधिक होता है तो इसे भी इस स्कीम के तहत कवर किया जा सकता है किन्तु गारंटी कवर केवल 50 लाख रूपए की क्रेडिट सुविधा के लिए होगा। इस स्कीम के तहत अन्य महत्वपूर्ण अपेक्षा यह है कि ऋण प्राप्तकर्ता यूनिट को एकल ऋणदाता संस्थान से ही क्रेडिट सुविधा लेनी चाहिए। हालॉकि राज्य स्तरीय संस्थानों/एनएसआईसी/एनईडीएफसी द्वारा पहले ही सहायता प्राप्त कर चुकी यूनिटों को इस स्कीम के तहत शामिल किया जा सकता है जिससे उन्हें सदस्य बैंकों से क्रेडिट सुविधा उपलब्ध हो सके, बशर्ते वे अन्यथा पात्र हों। सरकार अथवा अन्य एजेंसी द्वारा संचालित किसी अन्य स्कीम के तहत अतिरिक्त जोखिम कवर वाली कोई भी क्रेडिट सुविधा इस स्कीम के तहत कवरेज के लिए पात्र नहीं होगी।
गारंटी कवर
5. इस स्कीम के तहत उपलब्ध गारंटी कवर क्रेडिट सुविधा की स्वीकृत राशि का 75 प्रतिशत तक है। गारंटी कवर की सीमा 80 प्रतिशत है (i) 5 लाख रूपए तक के ऋण लेने वाले सूक्ष्म उद्यमों के लिए; (ii) महिलाओं द्वारा संचालित और/अथवा स्वामित्व वाले एमएसई के लिए तथा (iii) पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी ऋणों के लिए। भुगतान न होने की स्िथति में, ऋणदाता संस्थान द्वारा दी गई क्रेडिट सुविधा की भुगतान न गई (डिफाल्टर) राशि के 75 प्रतिशत तक (अथवा 80 प्रतिशत जहॉ कहीं लागू हो) के दावे का निपटान ट्रस्ट करता है। इस प्रयोजन के लिए आवधिक ऋण के संबंध में, भुगतान न की गई राशि को तथा अनुत्पादक परिसम्पत्तियों (एनपीए) में परिवर्तित को बकाया कार्यशील पूंजीगत सुविधाओंकी राशि सहित ब्याज को उधार लेने वाले के खाते में बकाया पड़े मूलधन के रूप में गिना जाता है।
गारंटी की अवद्यि
6. इस स्कीम के तहत गारंटी कवर आवधिक ऋण/मिश्रित क्रेडिट की सहमत अवधि है। कार्यशील पूंजी के संबंध में, गारंटी कवर 5 वर्ष अथवा 5 वर्षों के ब्लॉक के लिए है।
गारंटी का शुल्क
7. इस स्कीम के तहत ट्रस्ट को देय शुल्क स्वीकृत क्रेडिट सुविधाओं का एक-बारगी 1.5 प्रतिशत का गारंटी शुल्क तथा 0.75 प्रतिशत का वार्षिक सेवा शुल्क है। 5 लाख रूपए तक के ऋण के लिए, एक बारगी गारंटी शुल्क तथा वार्षिक सेवा शुल्क क्रमश: 1 प्रतिशत तथा 0.5 प्रतिशत है। इसके अलावा, पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऋण के लिए एक बारगी गारंटी शुल्क केवल 0.75 प्रतिशत है।
वेबसाइट
8. सीजीटीएमएसई का संचालन इंटरनेट के माध्य से होता है। सीजीटीएमएसई की वेबसाइट: www.cgtsi.org.in पर है।
स्कीम जागरूकता कार्यक्रम
9. सीजीटीएमएसई ने बैंकों, एमएसई संघों, उद्यमियों आदि के बीच अपनी गारंटी स्कीम के संबंध में जागरूकता सृजित करने के लिए प्रिंट तथा इलेक्ट्रोनिक मीडिया के माध्यम से, कार्यशालाएं/सेमिनार आयोजित करके, जिला/राज्य/राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित विभिन्न बैठकों में भाग लेकर बहु-चैनल अप्रोच अपनाई है। क्रेडिट गारंटी स्कीम पर 31 मार्च,2010 तक 1080 कार्यशालाएं तथा सेमिनार आयोजित किए गए थे। सीजीटीएमएसई ने भी भारतीय रिजर्व बैंक/ अन्य सरकारी कार्यालयों द्वारा आयोजित 19 प्रदर्शनियों में तथा 304 एसएलबीसी/बैंकों में भाग लिया। इस स्कीम के संवर्धन तथा इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए बैंकों, उद्योग संघों तथा अन्य हितधारियों को पोस्टर तथा मेल परिचालित किए गए। एमएलआई को उनके प्रशिक्षण कालेजों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए, इस स्कीम की परिचालनात्मक मोडेलिटिज दर्शाने वाली मल्टी-मीडिया सीडी-आरओएम, एमएलआई के कर्मचारी प्रशिक्षण केन्द्रों/कालेजों में वितरित किए गए। ट्रस्ट ने हाल ही में डीएवीपी के माध्यम से देशभर के 194 समाचार पत्रों में इस अभियान का विज्ञापन दिया है जिससे लक्षित समूह में इस स्कीम के प्रति काफी जागरूकता उत्पन्न हुई है।
सीजीटीएमएसई की परिचालनात्मक विशेषताएं
31 मार्च, 2010 तक की स्िथति के अनुसार 10 सीजीटीएमएसई की परिचालनात्मक विशेषताओं में 35 राज्यों/संघ शासित क्षेत्रोंमें 85 एमएलआई द्वारा बढ़ाई गई 11550.61 करोड़ रूपए के कुल क्रेडिट के लिए गारंटी कवर हेतु 3,00,105 सूक्ष्म और लघु उद्यमों के प्रस्तावों को अनुमोदित किया जा चुका है। निम्नलिखित तालिका में वर्ष-वार वृद्धि की स्थिति दर्शाई गई है:-
अवधि |
सक्रिय एमएलआई |
अनुमोदित प्रस्तावों की संख्या |
अनुमोदित क्रेडिट राशि (लाख रूपए में) |
वित्त वर्ष 2000-01 |
9 |
951 |
606 |
वित्त वर्ष 2001-02 |
16 |
2296 |
2952 |
वित्त वर्ष 2002-03 |
22 |
4955 |
5867 |
वित्त वर्ष 2003-04 |
29 |
6603 |
11760 |
वित्त वर्ष 2004-05 |
32 |
9516 |
32677 |
वित्त वर्ष 2005-06 |
36 |
16284 |
46191 |
वित्त वर्ष 2006-07 |
40 |
27457 |
70453 |
वित्त वर्ष 2007-08 |
47 |
30825 |
105584 |
वित्त वर्ष 2008-09 |
57 |
53708 |
219940 |
वित्त वर्ष 2009-10 |
85 |
151387 |
687511 |
सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम की स्कीम
भारत सरकार ने 2003-04 में सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम की स्कीम प्रारंभ की है। सिडबी से ऋण प्राप्त करने के लिए एमएफआई/एनजीओ से अपेक्षित प्रतिभूति जमा के रूप में योगदान करके इस स्कीम को सिडबी के वर्तमान कार्यक्रमों से जोड़ दिया गया है। यह स्कीम अब तक वंचित (अनर्सण्ड) राज्यों में तथा अन्य राज्यों के वंचित हिस्सों/जिलों में चलाई जा रही है।
भारत सरकार सिडबी को सूक्ष्म-वित्त कार्यक्रम जिसे ‘पोर्टफोलियों रिस्क फंड’ (पीआरएफ)कहते हैं, के लिए निधियॉ उपलब्ध कराती है। इस समय सिडबी ऋण राशि के 10 प्रतिशत के बराबर फिक्सड डिपॉजिट लेता है। एमएफआई/एनजीओ का हिस्सा ऋण राशि का 2.5 प्रतिशत (अर्थात प्रतिभूति जमा का 25 प्रतिशत) भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई निधियों से समायोजित किया जाता है।
31 मार्च, 2010 तक सरकार ने ‘पोर्टफोलियों रिस्क फंड’ (पीआरएफ) के रूप में 80.00 करोड़ रूपए की राशि जारी की है। 2009-10 के दौरान 6.00 करोड़ रूपए की राशि जारी की गई। 31 मार्च, 2010 तक इस स्कीम के तहत 1299.68 करोड़ रूपए की संचित ऋण राशि एमएफआई/एनजीओ को दी गई थी, जिससे लगभग 20.21 लाख व्यक्ति लाभान्वित हुए। इसमें से लगभग 80 प्रतिशत महिला लाभार्थी हैं।
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